Inspiration : Sri Ramakrishna


अद्वयतत्त्वसमाहितचित्तं प्रोज्ज्वलभक्तिपटावृतवृत्तम् ।
कर्मकलेवरमद्भुतचेष्टं यामि गुरुं शरणं भववैद्यम् ॥

 

Whose mind is absorbed in Advaita, who is draped in bright cloth of Devotion, whose life is for the welfare of the world, whose work is extraordinary, who is the healer of transmigratory existence, I take refuge in that Guru.

 

जिनका मन अद्वैत में लीन है, जो भक्ति के अति उज्ज्वल वस्त्र से आवृत हैं, जिनका जीवन विश्व के कल्याण के लिए है, जिनका कार्य अद्भुत है, जो संसार रूपी रोग का चिकित्सा करते हैं, मैं उन गुरु की शरण लेता हूं।

 

যাঁহার চিত্ত অদ্ৱৈততত্ত্ৱে সমাহিত, যাঁহার চরিত্র অতি উজ্জ্ৱল ভক্তিরূপ বস্ত্রের দ্বারা আবৃত, যাঁহার জীবন লোককল্যাণে নিযুক্ত, যাঁহার কার্যাবলী অসাধারণ, সেই সংসাররোগের চিকিত্‍সক গুরুর আশ্রয় গ্রহণ করি |


 

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